उत्तराखंड

उत्तराखंड सर्वे में भाजपा को 54 सीटों का अनुमान

Kavita2
14 Sept 2026 9:36 AM IST
उत्तराखंड सर्वे में भाजपा को 54 सीटों का अनुमान
x

देहरादून। उत्तराखंड में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले सामने आए एक हालिया सर्वे ने सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी का उत्साह बढ़ा दिया है। एक मीडिया संस्थान द्वारा कराए गए इस सर्वे में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व और उनकी सरकार के कामकाज के प्रति अलग-अलग सामाजिक तथा आयु वर्गों में समर्थन होने का दावा किया गया है। सर्वे के आधार पर अनुमान लगाया गया है कि मौजूदा जनमत चुनाव परिणाम में बदलता है तो भाजपा राज्य की 70 सदस्यीय विधानसभा में 54 सीटें जीत सकती है।

उत्तराखंड विधानसभा में सरकार बनाने के लिए किसी भी दल को कम से कम 36 सीटों की आवश्यकता होती है। ऐसे में भाजपा को 54 सीटें मिलने का अनुमान स्पष्ट बहुमत से काफी अधिक है। यदि यह अनुमान वास्तविक चुनाव परिणाम में बदलता है तो भाजपा उत्तराखंड में लगातार तीसरी बार सरकार बनाकर नया राजनीतिक रिकॉर्ड स्थापित कर सकती है। हालांकि सर्वे किसी चुनाव परिणाम की गारंटी नहीं होता और चुनाव होने तक मतदाताओं की राय में बदलाव संभव है।

सर्वे में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की विभिन्न सामाजिक वर्गों में स्वीकार्यता का भी आकलन किया गया है। इसके मुताबिक बनिया और कायस्थ वर्ग में 57.3 प्रतिशत लोगों ने धामी के नेतृत्व का समर्थन किया। अन्य पिछड़ा वर्ग में यह आंकड़ा 50.6 प्रतिशत दर्ज किया गया। पंजाबी और सिख समुदाय में 49.7 प्रतिशत समर्थन मिलने का दावा किया गया है।

ब्राह्मण समाज के 46.3 प्रतिशत और राजपूत वर्ग के 46.1 प्रतिशत प्रतिभागियों ने मुख्यमंत्री के पक्ष में अपनी राय व्यक्त की। अनुसूचित जाति वर्ग में भी धामी को 45.3 प्रतिशत समर्थन मिलने का दावा है। इन आंकड़ों के आधार पर भाजपा यह संदेश देने का प्रयास कर सकती है कि मुख्यमंत्री की स्वीकार्यता किसी एक जाति या समुदाय तक सीमित नहीं है।

आयु वर्ग के आधार पर सामने आए आंकड़ों में भी मुख्यमंत्री को विभिन्न पीढ़ियों का समर्थन मिलने की बात कही गई है। सर्वे के अनुसार 18 से 25 वर्ष की आयु वाले 37.8 प्रतिशत प्रतिभागियों ने धामी का समर्थन किया। 26 से 35 वर्ष के लोगों में यह आंकड़ा 43 प्रतिशत और 36 से 50 वर्ष के आयु वर्ग में 46.8 प्रतिशत दर्ज किया गया।

सर्वे में 51 से 60 वर्ष के 50.3 प्रतिशत और 60 वर्ष से अधिक उम्र के 51.8 प्रतिशत लोगों ने मुख्यमंत्री धामी के नेतृत्व के प्रति समर्थन जताया। इससे संकेत मिलता है कि अधिक आयु वाले मतदाताओं के बीच मुख्यमंत्री को अपेक्षाकृत ज्यादा समर्थन मिला। युवा मतदाताओं में भी भाजपा को समर्थन मिलने की बात सामने आई है लेकिन अन्य आयु वर्गों की तुलना में इसका प्रतिशत कुछ कम रहा।

राज्य की महिलाओं को आरक्षण देने के सरकार के फैसले पर सर्वे में 88 प्रतिशत प्रतिभागियों ने पूर्ण समर्थन व्यक्त किया। केवल पांच प्रतिशत लोगों ने इसका पूरी तरह विरोध किया। महिला मतदाता उत्तराखंड की राजनीति में निर्णायक भूमिका निभाती रही हैं। चुनाव में महिलाओं की भागीदारी और मतदान प्रतिशत को देखते हुए यह आंकड़ा भाजपा के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

देवभूमि की पहचान और उत्तराखंड के मूल स्वरूप की रक्षा से जुड़े सवाल पर करीब 70 प्रतिशत लोगों ने सरकार के प्रयासों का पूर्ण समर्थन किया। भाजपा सरकार लंबे समय से राज्य की सांस्कृतिक पहचान, धार्मिक स्थलों की सुरक्षा और जनसांख्यिकीय बदलाव से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता से उठाती रही है। सर्वे के आंकड़े इन विषयों पर सरकार के पक्ष में जनसमर्थन होने का दावा करते हैं।

सर्वे में समान नागरिक संहिता यानी यूसीसी, सख्त नकल विरोधी कानून, महिला सशक्तीकरण, विकास और सुशासन से जुड़े फैसलों को मुख्यमंत्री धामी की बढ़ी हुई स्वीकार्यता का आधार बताया गया है। उत्तराखंड में प्रतियोगी परीक्षाओं के पेपर लीक और नकल के मामलों के बाद सरकार ने सख्त नकल विरोधी कानून लागू किया था। भाजपा इसे युवाओं के हित में उठाया गया बड़ा कदम बताती रही है।

उत्तराखंड में भाजपा ने 2017 के विधानसभा चुनाव में 70 में से 57 सीटों पर जीत दर्ज की थी। वर्ष 2022 में पार्टी की सीटें घटकर 47 रह गईं लेकिन भाजपा ने दोबारा बहुमत हासिल कर सरकार बनाई। कांग्रेस को 2017 में 11 और 2022 में 19 सीटें मिली थीं। इस लिहाज से सर्वे में भाजपा को अनुमानित 54 सीटें मिलना 2022 के मुकाबले सात सीटों की बढ़त का संकेत देता है।

सर्वे का अनुमान भाजपा के लिए उत्साहजनक है लेकिन पार्टी के सामने कई राजनीतिक और प्रशासनिक चुनौतियां भी हैं। पहाड़ी क्षेत्रों से पलायन, बेरोजगारी, भर्ती परीक्षाओं की पारदर्शिता, स्वास्थ्य सुविधाएं, सड़क संपर्क, प्राकृतिक आपदाएं और जंगली जानवरों के हमले जैसे मुद्दे चुनावी माहौल को प्रभावित कर सकते हैं। कांग्रेस और अन्य विपक्षी दल सरकार को इन्हीं विषयों पर घेरने की तैयारी कर रहे हैं।

राजनीतिक सर्वेक्षण किसी विशेष समय पर सीमित लोगों से ली गई राय को दिखाते हैं। सर्वे में शामिल लोगों की संख्या, चयन प्रक्रिया, विधानसभा क्षेत्रों का प्रतिनिधित्व और संभावित त्रुटि सीमा जैसे तथ्य उसकी विश्वसनीयता समझने के लिए महत्वपूर्ण होते हैं। उपलब्ध रिपोर्ट में सर्वे कराने वाले मीडिया संस्थान का नाम और विस्तृत कार्यप्रणाली स्पष्ट रूप से नहीं बताई गई है। इसलिए 54 सीटों के अनुमान को संभावित राजनीतिक रुझान माना जाना चाहिए न कि तय चुनाव परिणाम।

फिलहाल सर्वे ने भाजपा और मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को राजनीतिक बढ़त का दावा करने का अवसर दिया है। दूसरी ओर विपक्ष सर्वे की पद्धति और वास्तविक जनसमस्याओं को लेकर सवाल उठा सकता है। 2027 का चुनाव नजदीक आने के साथ नए राजनीतिक समीकरण और स्थानीय मुद्दे मतदाताओं की राय को प्रभावित करेंगे।

Next Story